Rhythmic Words ~ 31

इस निस्तब्धता को तुम, मेरी खामोशी न समझ लेना,
सुलगते हुए पावक को, सिर्फ चिंगारी न समझ लेना।
दरियाओं को समेटकर भी, शांत जलधि सा गहरा हूँ,
पर दबी हुई सुनामी को, सिर्फ आँधी न समझ लेना।

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Rhythmic Words ~ 29

जल गए घर, फैला गया अंगार शहर की गलियों में।
नफरत की जलन, जब बन गयी प्रतिघाती!
बिंध कर रह गयी मोहब्बत, प्रतिशोध की दीवारों में।

Rhythmic Words ~ 28 (योगी आदित्यनाथ)

जयचंदों की जमात से इतिहास होता रहा शर्मिंदा है,
हार पे नहीं कोई शोक मुझे, मेरे हृदय में योगी जिंदा है।

No doubt when I look upto the pool of leaders in today’s politics, for me one name always outshine among them, a sanyasi hindu monk “yogi adityanath”. Always trying his best as chief minister of largest state of India, Uttar Pradesh to provide better governance compared to previous ones. This state in itself is larger then many other prominent countries of world.

His fearlessness and ferocity has always intrigued me, I have watched his every speech in parliament! Just his face on TV screen used to bring happiness on my face, but alas when I heard about loss in Gorakhpur loksabha constituency, it broke me down to core! The sacrifice the dedication he showed towards the people of his constituency, They can’t even repayed him properly. As a history student I do remember a sad part of our past, sharing it below do ponder over it.

सन 1757 में जब पलासी का युद्ध लड़ा जा रहा था तो नवाब की सेना में जितने योद्धा थे उस से कहीं ज्यादा बग़ावती लोग, युद्ध के मैदान के बाहर खड़े होकर अंग्रेजों के हाथों उनकी होती हार का तमाशा देख रहे थे और तालियाँ बजा रहे थे। इतिहास गवाह है उस युद्ध में हुई हार ने भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़ने के लिए विवश कर दिया।
आज भी वैसे लोग या कहें उनके वंशज हमारे समाज मे मौजूद हैं, जो वोट देने के लिए बूथ तक तो जाने की ज़हमत नहीं उठाते परंतु बाद में अपनी इस भूल पे बैठ कर पश्चाताप जरूर करते है।

बस इतना ही कहूँगा गोरखपुर वाशियों-

Rhythmic Word ~ 26

दिल ये मेरा ठहरा पाषाण पत्थर!
आसाँ नहीं इश्क़ का यूँ मुझमें घुल जाना साक़ी।
बेशक उड़ेल दे अपनी निगाहों से तेज़ाब,
आखिरी प्याला तेरे नाम का, है अभी भी बांकी।

Dil ye mera thehra pashan pathhar,
Asaan nahin isq ka yuun mujhme ghul jana saki.
Beshak udhel de apni nigahon se tezab,
Aakhiri pyala tere naam ka, hai abhi bhi banki.

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Rhythmic Words ~ 24

ओ रे ख़ुदा! बेदर्द क्यूँ हैं मेरे लिए तेरे सारे फैसले,
बिखरी क्यूँ पड़ी है, सिलवटों में सारी उम्मीदें मेरी।
इंद्रधनुषी रंगों से जो सजायी सबकी दुनिया तूने,
फिर सफेद चादर की माफ़िक क्यूँ ये जिंदगी मेरी?