Re-Blog: 1.चिन्टूआ के इंजिनियर बनने की कहानी

रविन्द्र जैसवाल जी ने अपने ब्लॉग मेरा नज़रिया में एक बहुत ही समसामयिक विषय पे कुछ लिखा है। मैं उनकी अनुमति से ईसे रीब्लॉग कर रहा हूँ, आपको भी ये पसंद आएगी जरुर पढ़ें।

meranazriya ("मेरा नज़रिया ")

ये कहानी खाश तौर से पुर्वी UP और बिहार उन छात्रों की है जो देखा-देखी B-Tech की डिग्री के लिये कोई भी कालेज में दाखिला ले लेते है। और उसके बाद घर बैठ कर सरकारों को कोसते है। चिंन्टूआ से इंजिनियर चितरंजन प्रसाद बनने का सफ़र कैसा रहा और कैसे ये बेरोज़गारी के ब्रांड एंबासडर बन गये , इस कहानी में आपको बताऊगा.

ये कहानी सन 2000 में शुरू होती है। ज़िला गाजिपुर के एक छोटे से गाँव में रहने वाला चिन्टूआ दसवी कक्षा में था। बाबू जी किसान थे , अच्छी खाशी खेती थी। भैया आर्मी में थे , परिवार में सम्पन्न्ता थी। मिडिल स्कूल के बाद कस्बा के एक नामी सरकारी स्कूल में एड्मिशन ले लिया। क्षेत्रिय प्रतिभा खोज में अव्वल आने से चिन्टूआ का काफ़ी धाक था गाँव में। सरकारी स्कूल में आने के बाद वहाँ चिन्टूआ की मुलाक़ात मोहन से हुई। मोहन काफ़ी गंभीर लड़का था…

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