रूठे रिश्ते!

Third Collaboration by Me and Nandita! This time it was process reversal, Idea and content were of Nandita and I simply played with few words. I hope you all would love it and dont forget to give your valuable feedbacks.

था गुमां मुझे जिन बुलंदियों पे,
झूठे उस ग़ुरूर के सन्मुख,
प्यार भरे रिश्ते, सूली चढ़ गए।
निकल आयी थी मिलों दूर,
बंधन भी सारे, पीछे छूट गए।
मैं चलती रही, अपनी धुन में
और जीवन के इस सफर में,
मुझसे मेरे वो अपने रूठ गए

अनजान अंधकारमय डगर पे,
मेरी नन्ही उंगलियों को थामे,
वो संभलकर चलना सीखा गए।
नादानियों पे आंखें तरेरकर,
वो सबल बन जीना सीखा गए।
मैं डूब गयी जरा चकाचौंध में,
और जीवन के इस सफर में,
मुझसे मेरे वो अपने रूठ गए।

दुखों के जलधि को समेटकर,
मेरी खुशियों को सहेजकर,
त्याग पे त्याग वो करते गए।
मात पिता के आश्रय बल तले,
मेरे मैं को थे झूठे पर लग गए।
मैं उड़ती रही, खयाली नभ में,
और जीवन के इस सफर में,
मुझसे मेरे वो अपने रुठ गए।

वो अनकहा प्रेम बाबुल का,
वो सौगात भरा दामन मां का
राहों को मेरे रोशन करते गए।
हठ करती रही मैं तो हमेशा,
पर वो नज़रअंदाज़ करते गए।
भटकी मैं मायावी दुनिया में,
और जीवन के इस सफ़र में,
मुझसे मेरे वो अपने रूठ गए।

अर्थ अनर्थ के समझ से परे,
जिस उन्माद के बंधन तले,
छोड़ आयी थी अपने घरौंदे को।
वो जुनून भी ठुकरा गया मुझे,
एक नई मंजिल तलाशने को।
अब पश्चाताप के गर्त में डूब,
ढूंढूं कहाँ पुराने जज्बातों को?
मनाऊं कैसे मैं अपने रूठों को?

By Nandita and Gouri

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Author: Gouri (Gourav Anand)

शब्दों को जोड़ तोड़ कर अपने मन में आये हुए विचारों को लिख डालता हूँ। कोई पेशेवर या उच्च कोटि का कवि या लेखक तो नहीं, हाँ पर साहित्यिक और ऐतिहासिक विचारों से प्रेरित जरुर हूँ। Native of silk city Bhagalpur and feel proud to be from a state which is well known for its historical, political and literary significance. By profession a housekeeper and hotelier, Graduated from IHM Pusa, New Delhi. Apart from Hindi and English well fluent in Urdu, Sanskrit and Maithli. Settled in cleanest city of India. Indore, Madhya Pradesh.

28 thoughts on “रूठे रिश्ते!”

  1. जो प्रेम लुटाये उनसे ही हम दूर हो गए,
    चाहत थी कुछ पाने की,
    खुद से दूर हो गए।
    लाजवाब लेखन ।बेहतरीन कविता।

    Liked by 3 people

      1. Thank you abhay for reminding of this unintentional error happened by me. Therefore I am not going to edit it sometimes sentences of gratitude remains the same and you miss out to do small changes while typing it.
        And Nandita would never mind it. But anyways thanks abhay for pointing out this..

        Liked by 1 person

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